राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को विपणन (मार्केटिंग) प्रोत्साहन 

योजना/कार्यक्रम का नाम

राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को विपणन (मार्केटिंग) प्रोत्साहन 

योजना अधीन

(राज्य/भारत सरकार)

राज्य सरकार

योजना का प्रारम्भ वर्ष

2015

योजना का उद्देश्य

राज्य सरकार ने राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा उत्पादित उत्पादों का विपणन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों एवं राज्य सरकार के उपक्रमों में सुनिश्चित करने हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा अनुभाग द्वारा अधिसूचना दिनांक 19.11.2015 जारी की गई। इस अधिसूचना के तहत राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को निविदा में भाग लेने पर कई सुविधाएं देय हैं!

योजना में देय लाभ

इस अधिसूचना के तहत राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को निविदा में भाग लेने पर निम्न सुविधाएं देय हैं:

  1. पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को टेण्डर फार्म आधी कीमत पर दिये जाने का प्रावधान।
  2. निविदा में भाग लेने पर अर्नेस्ट मनी 0.5% व सिक्युरिटी मनी 1%दिये जाने का प्रावधान।
  3. 99 उत्पादों को आरक्षित जिनका विनिर्माण करने वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से ही क्रय किया जाना अनिवार्य है।
  4. राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को क्रय वरीयता दिये जाने का प्रावधान है, जिसके अन्तर्गत आपूर्ति मात्रा का न्यूनतम दर पर 80% राज्य की औद्योगिक इकाईयों से एवं उसमें 60%राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों एवं इस 60%का 4% SC/STस्वामित्व वाली इकाईयों से ही क्रय किये जाने का प्रावधान है।

योजना का विवरण

राज्य सरकार ने राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा उत्पादित उत्पादों का विपणन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों एवं राज्य सरकार के उपक्रमों में सुनिश्चित करने हेतु सामान्य वित्तीय एवं लेखा अनुभाग द्वारा अधिसूचना दिनांक 19.11.2015 जारी की गई। इस अधिसूचना के तहत राज्य की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को निविदा में भाग लेने पर उक्त सुविधाएं देय हैं-

इन नियमों की अवहेलना का प्रकरण किसी औद्योगिक इकाई अथवा औद्योगिक संघ द्वारा कार्यालय आयुक्त, उद्योग के ध्यान में लाया जाता है, तो संबंधित विभाग को नियमों की पालना बाबत लिखा जाता है, फिर भी यदि कोई विभाग इन नियमों की पालना नहीं करता है, तो प्रकरण वित्त विभाग के ध्यान में लाया जाता है।

विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा क्रय किये जाने वाला आईटम अनुसूची प्रथम में सम्मिलित होने पर विभाग का अधिकारी आयुक्त, उद्योग के प्रतिनिधि के रूप में क्रय समिति की बैठकों में सम्मिलित होगा। इस हेतु विभागीय अधिकारियों को विभाग आवंटित हैं।

वित्त (सा.वि.ले.नियम) विभाग, राजस्थान, जयपुर के आदेश क्रमांक- एफ.1(8)वित्त/सा.वि.ले.नि./2011 दिनांक 19.11.2015 के नियम-3(e) की अनुपालना में उद्योग विभाग के प्रतिनिधि, जो उप निदेशक, सहायक निदेशक, जिला उद्योग अधिकारी तथा महाप्रबंधक को आयुक्त, उद्योग के प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने हेतु शिड्यूल में उल्लेखित उत्पादों की खरीद सम्बन्धित बैठकों में भाग लेने हेतु अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य स्त्रोत से खरीद किये जाने वाले आईटम्स, जो दस लाख से अधिक के मूल्य के सामानों के क्रय हेतु गठित क्रय समिति की बैठकों में भी उद्योग विभाग के प्रतिनिधि को भी अधिकृत किया गया है।

सूक्ष्म, लघु उद्यमियों के विपणन प्रोत्साहन हेतु राज्य सरकार के आदेश क्रमांक-प.37/उद्योग/2/2001 दिनांक 10.11.2003 4.4.2013 की पालना में राजसीको द्वारा आपूर्ति किये जाने वाले स्टील फर्नीचर, टेन्ट एवं त्रिपाल, बारबेड वायर, पालीथिन बैग उत्पादों की दरें निर्धारण करने हेतु आयुक्त, उद्योग की अध्यक्षता में दर निर्धारण समिति का गठन किया गया है।

सूक्ष्म, लघु औद्योगिक इकाईयों के विपणन प्रोत्साहन हेतु मेले एवं प्रदर्शनी के आयोजन बाबत राशि उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के पी.डी.खाते में स्थानान्तरित करने हेतु पत्रावली राज्य सरकार को प्रेषित की जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में मेले/प्रदर्शनी मद में 1.15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त शहरी एवं ग्रामीण हाट संचालन हेतु 20.00 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है, जिसे संबंधित जिला उद्योग केन्द्रों को उनकी मांग के अनुसार आवंटित कर दी गई है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1.15 करोड़ रुपये की राषि प्रावधित की गई थी तथा ग्रामीण एवं शहरी हाटों के संचालन के लिए 20.00 लाख रु. की राशि का आवंटन किया गया है।

योजना हेतु पात्रता

योजना में आवेदन की प्रक्रिया

योजना में आवेदन का लिंक

आवेदन की सामान्य अवधि

किसी भी समय

चयन व आवंटन की प्रक्रिया

किसी भी विभाग की सम्बंधित निविदा में आवेदन व भागीदारी अनुसार

योजना की प्रगति

वित्तीय वर्ष 2017-18 में मेले/प्रदर्शनी मद में 1.15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त शहरी एवं ग्रामीण हाट संचालन हेतु 20.00 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है, जिसे संबंधित जिला उद्योग केन्द्रों को उनकी मांग के अनुसार आवंटित कर दी गई है।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में 1.15 करोड़ रुपये की राशि प्रावधित की गई थी तथा ग्रामीण एवं शहरी हाटों के संचालन के लिए 20.00 लाख रु. की राशि का आवंटन किया गया है।



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